मित्रो आज आपको क्षत्रिय परिहार/प्रतिहार/पड़िहार/पढ़ियार वंश की कुलदेवी के बारे मे जानकारी देंगें
प्रतिहार वंश की कुलदेवी मां चामुण्डा जी (गाजणा माता) जी है गाजण माता का पौराणिक ऐतिहासिकता दसवी सदी का प्रख्यात मंदिर राजस्थान के मारवाड के पाली जिले मे है पाली जिले के मुख्यालय से 10किलौमीटर दुरी धर्मधारी गाव मे पहाडी की गुफा मे विराजमान है यहां पर पुरे हिन्दुस्तान से क्षत्रिय प्रतिहार राजपूत आते है।।
धर्मधारी गाव (चौटीला)-इस गाव का इतिहास भी परिहारों से जुडा हुआ है इस गाव की नींव स्थापना सन् 1010 वी मे मारवाड के महाराव नाहडराव जी प्रतिहार ने की थी नाहडराव जी चामुंडा जी के परमभक्त थे उसके बाद ये गांव माताजी की सेवा के लिये राजपुरोहितो को दान मे दिया परिहारों ने व आज भी इन्ही राजपुरोहितो के वंशज मंदिर की देखरेख व पूजा अर्चना करते है वर्तमान में पुजारी भवरसिंह जी राजपुरोहित है।।
इस मंदिर के पास हजारो बीघा जमीन है जो माताजी की औरण है व बहुत ही सुन्दर रमणीय क्षेत्र है
ओम बन्ना भी इसी गाव चौटीला के थे जो मात़ाजी के परमभक्त थे
प्रसिद किवदन्ती मंदिर के बारे में - इस मंदिर के बारे मे कहा जाता है कि जब मारवाड (वर्तमान मे जोधपुर ,पाली,नागौर,जालौर,मेडतां,बाडमेर,)के प्रतिहार /पडिहार राजा नाहडराव जी बारात लेकर जा रहे थे तब मंडोर मे विराजमान चामुंडा जी से आग्रह किया कि हे माँ आप भी हमारे साथ बारात मे चले, चामुंडा जी ने कहा कि मुझे कही रुकने का कह दिया तो मैं आगे नही बढुगीं इन्ही वचनों के साथ मां चामुंडा रवाना हुये।।
नाहड़राव जी की बारात जब पाली चोटीला के पास धर्मधारी गाव से होकर गुजर रही थी ढोल, नगाडो, रथों के,विशाल फौज के साथ तब बाडमेर जिले के रमणीया गाव से करपालजी पुरोहित अपने गायों का डेरा डालकर पर्वत के पास गाय चरा रहे थे तब शोर शराबा राव जी के विशाल बारात को देखकर गाये ईधर उधर भागने लगी तब करपालजी ने गायों को रोकने के लिये जैसे ही रुक जा माई रुक जा कहा तो आकाश मे भयंकर गर्जना होने लगी आंधी तुफान आने लगे इतने मे मां चामुंडा जी भयकंर गर्जना के साथ पास की पहाडी को चिरकर गुफा में विराजमान हो गई और नाहडराव जी अनहोनी को स्वीकार करके आगे बढे।।
*चामुंडा-भयंकर गर्जना के साथ विराजमान होने के कारण गाजण माता जी (गाजण मां)नाम से प्रतिहार /परिहार क्षत्रियों की कुलदेवी प्रसिद हुई
2 दूसरा मंदिर *-गाजण माता जी का दूसरा मंदिर,- जोधपुर जिले के बेलवा गाव मे पहाडी पे है जो एक चमत्कारिक मंदिर माना जाता है यह मंदिर भी यहा के ईंदा प्रतिहार ठाकुर सा को माताजी ने दर्शन दिये थे।।
3 चामुंडा जी का तीसरा मंदिर-गाजण मा (चामुंडा) का तीसरा मंदिर मेहरानगढ जोधपुर किले मे है। प्रतिहारों के द्वारा राव चूंडा राठौड को मंडोर दहेज देने के बाद राठौड लोग मां चामुंडा को इष्टदेवी के रुप में पूजने लगे। और जब जोधपुर किले का निर्माण हुआ तो इन्हे भी मंडोर से जोधपुर किले में स्थापित किया गया। व साथ मे एक परिहार राजपूत व हडबुजी साथ थे। जोधपुर में मां चामुंडा का यह मंदिर बहुत प्रसिद है। मारवाड की इस देवी ने अपने चमत्कारों से मारवाड के दुशमनों से इस क्षेत्र की रक्षा की है। यहां के सभी वर्गों में माता के प्रति अटूट श्रद्धा है।
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जय चामुंडा।।
जय गाजणा।।
जय मिहिरभोज।।
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