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गुरुवार, 10 जनवरी 2019

पांडूका में मिली प्रतिहार/परिहार कालीन बावड़ी "

पांडूका में मिली प्रतिहार/परिहार कालीन बावड़ी "


मेड़ता सिटी





सोगावास ग्राम पंचायत के राजस्व ग्राम पांडूका में माताजी मंदिर के पीछे स्थित नाड़ी में एक बावड़ी के अवशेष मिले हैं। यह बावड़ी सातवीं शताब्दी में निर्मित हुई थी। यह प्रतिहार कालीन है। वहां मिले एक शिलालेख से इसकी पुष्टि हुई है। मंदिर समिति इन दिनों नाडी की मिट्टी खुदवा रही है।

जेसीबी से खुदाई के दौरान अचानक भगवान गणेश की कुछ मूर्तियां, एक मंदिर का शिखर गुफानुमा सुरंग में कुछ सीढ़ियां नजर आई। इस आधार पर यहां बावड़ी मिलने का दावा किया जा रहा है। मंदिर पुजारी महावीर वैष्णव तथा कांतीदास वैष्णव आदि ने भी खुदाई में बावड़ी निकलने की पुष्टि की है।

सूचना मिलने पर राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के इतिहासकार नरेन्द्र सिंह शेखावत मौके पर पहुंचे और पुजारियों से इस बाबत जानकारी ली। शेखावत ने भास्कर न्यूज को बताया कि वहां एक धातु पात्र, नाग-नागिन की मूर्ति एवं मंदिर के अवशेष मिले हैं।

बावड़ी की सीढिय़ां स्पष्ट दिखाई देने लगी है। उन्होंने बताया कि एकाध दिन में और अधिक खुदाई होने पर सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। शेखावत ने इस आशय की जानकारी कलेक्टर मेड़ता उपखण्ड अधिकारी राकेश कुमार गुप्ता को भी दी है। गुप्ता ने बताया कि प्राचीन बावड़ी के अवशेष मिलने की जानकारी मिली है। शनिवार को मौका देखा जाएगा।

पांडूका के माताजी मंदिर में मिले प्राचीन बावड़ी के अवशेष, यहां खुदाई जारी है।

मेड़ता में शासन की पुष्टि

प्राचीन बावड़ी पर लगे शिलालेखों से 7वीं शताब्दी में प्रतिहारों के शासन होने की तथा 13वीं शताब्दी में अल्लाउद्दीन खिलजी के प्रतिनिधि ताजूद्दीन अली के मेड़ता में शासन करने पुष्टि हो रही है।

जय माँ भवानी।।
जय क्षात्र धर्म।।

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